लेख साहित्य

कवितालोक सहित्यांगन का हिंदी दिवस पर काव्यगोष्ठी आयोजन

दिनांक 19 सितंबर को कविता लोक साहित्यांगन द्वारा “हिंदी दिवस”के उपलक्ष्य में “हिंदी” विषय पर आभासी माध्यम से ज़ूम ऐप पर आदरणीय महेश जैन ज्योति और पटल के सचिव कर्नल प्रवीण त्रिपाठी जी के निर्देशन में एक सफल काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता का दायित्व डॉ कैलाश नाथ मिश्रा जी ने सम्हाला। मुख्य अतिथि के रूप में डॉ प्रेमलता त्रिपाठी जी ने मंच की शोभा बढ़ाई। श्री महेश जैन ज्योति जी ने अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत किया। तदोपरांत अध्यक्ष महोदय और मुख्य अतिथि की उपस्थिति में शंखनाद से कार्यक्रम आरंभ हुआ। दीप प्रज्जवलन के उपरांत व्यंजना आनन्द जी ने सुमधुर स्वर में सरस्वती वंदना प्रस्तुत की।

जिसके पश्चात काव्यपाठ का शुभारंभ हुआ। जिसमें सभी सम्माननीय कवि और कवयित्रियों ने हिंदी भाषा के प्रति अपना प्रेम और हिंदी के उद्भव साथ ही हिंदी भाषा के प्रयोग का आह्वान किया साथ ही शिक्षा में हिंदी के काम प्रयोग पर चिंता भी जताई ।उन्होंने माना कि हिंदी का भविष्य उज्जवल है और देश, विदेशों की सभी भाषाओं में यह बोली समाहित होती जा रही है ।एक से एक सुंदर रचना और गीतों के प्रस्तुतीकरण से पटल पर मनमोहक छटा बिखर गई ।सभी सम्माननीय अतिथियों के काव्य पाठ की प्रस्तुतियां एक से बढ़कर एक थीं ।
विविधता पूर्ण रचनाएं कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण थीं।

काव्यपाठ में अनिता मंदिलवार ‘सपना’- निज भाषा की शान बढ़ाना, मंजरी निधि- कविता हिंदी तुम्हें शत-शत नमन, अनीता मिश्रा ‘सिद्धि’- इसको सुगम बनाएं, सब मिल कर इसकी शान बढ़ाएं, रीता सिंह – जनगण मन में जोश जगाया मेरी प्यारी हिंदी ने, मंजू मित्तल- हिंदी हिंदुस्तान की सबसे अधिक महान है, प्रीति मिश्रा- हिंदी से सुंदर कोई नहीं, अभिज्ञान शाकुंतलम- संस्कृत की बेटी हिंदी, सरल सहज इसकी पहचान, महेश जैन ‘ज्योति’- अभी अधूरा अभिनन्दन है अपनी प्यारी भाषा का, कर्नल प्रवीण त्रिपाठी- बने राष्ट्रभाषा अब हिंदी, बीड़ा हमें उठाना है, अर्चना गोयल ‘माही’- मैं भाषओं की रानी,आई हिंन्दुस्तान से, शेषपाल सिंह ‘शेष’- मातृ भाषा का क्षरण होने लगा, व्यथित हिंदी व्याकरण होने लगा,
डॉ प्रेमलता त्रिपाठी- गूँजे अखिल ब्रह्मांड में यह स्वाभिमान है हिंदी, प्रेमसिंह राजावत- हिंदी की है दुर्दशा, कुंडलिया व दोहे, श्रीमती प्रेम शर्मा -हिंदी का दमन किया विदेशियों ने, व्यंजना आनंद “मिथ्या” – हिंदी भाषा शान है, हिंदी है अभिमान, डाॅ० कैलाश नाथ मिश्र, अध्यक्ष, जय की परिभाषा है हिंदी जैसे विविध विषयों को लेकर उत्कृष्ट काव्यपाठ से न केवल श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर लिया अपितु सार्थक सन्देश देने का भी प्रयास किया।

कार्यक्रम का समापन करते हुए कर्नल प्रवीण त्रिपाठी जी ने अध्यक्ष महोदय डॉक्टर कैलाशनाथ मिश्राऔर मुख्य अतिथि डॉक्टर प्रेमलता त्रिपाठी जी का आभार प्रकट किया और सभी प्रतिभागियों को धन्यवाद ज्ञापित किया। इसके अतिरिक्त सफल संचालन के लिये सुश्री व्यंजना आनन्द जी और मंजरी निधि जी को भी सराहते हुए धन्यवाद दिया।

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