लेख साहित्य

सशक्त भारत

दुनियां में’ वतन का फिर परचम लहराना है।
सब भूल गये जिसको वह याद दिलाना है।1

जो नींद में’ था सोया खुद को भी’ न पहचाने।
कर्मठ बन फिर जग से लोहा मनवाना है।2

भारत में’ वो’ ताकत है चाहे मन जो कर ले।
कमज़ोर नहीं हम भी दुनियां को’ दिखाना है।3

वर्षों की’ गुलामी से उजड़ा था’ चमन अपना।
सूनी उस बगिया में फिर पेड़ लगाना है।4

रोके जो’ डगर कोई हम धूल चटा देंगे।
अब राह में उन्नति के व्यवधान हटाना है।5

आतंक के’ आका गण हिंसा को’ बढ़ावा दें।
अब ठोंक बजा उनको रस्ते पर लाना है।6

हम गर्व करें फिर से फिर उच्च शिखर पहुंचें।
हर भारवासी का सम्मान बढ़ाना है।7

कर्नल प्रवीण त्रिपाठी

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