लेख साहित्य

“रंगोली से जीवन में सारे रंग भरने दो”

आज…जिन्दगी
यूँ ही इतनी खामोश हुई जाती है..
इक दिन तो रौशन होने दो…
जगमग दीपों से घर आँगन
भरने दो उजालों से
मन का हर कोना…
गूँजने दो पटाखों का शोर
खिलने दो अनार,चकरी,.फुलझड़ी..
हँसने दो कम से कम
इक दिन तो बचपन,
लगे तो हम अब तक जिन्दा है….
बचपन इक दिन तो
लौटकर फिर आने दो.. .
फिर ओढ़ लेंगें कल से …
मौन फैशन का सूफियाना लिबास
आज तो बस दीपावली मनाने दो!
खुद को खुद से मिलाने दो….
दीपों से जज्बातों को सजाने दो…
प्रेम में रंगोली से
जीवन के सारे रंग भर ने दो..
रोशनी को दिलों में उजियारा करने दो
!!”
“शुभ दीपावली”

किरण मिश्रा “स्वयंसिद्धा”
नोयडा

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