आगरा उत्तर प्रदेश कार्यक्रम शिक्षा

नवीकरण एवं भाषा प्रसार विभाग द्वारा हिंदी भाषा संवर्धनात्मक पाठ्यक्रम ऑनलाइन का शुभारंभ किया गया।

आगरा। नवीकरण एवं भाषा प्रसार विभाग द्वारा हिंदी भाषा संवर्धनात्मक पाठ््यक्रम जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान, नामची (सिक्किम) के 50 प्रशिक्षणार्थियांे हेतु आज दिनांक 12.04.2021 (सोमवार) को भाषा संवर्धनात्मक पाठ््यक्रम का आॅनलाइन शुभारंभ किया गया। इस कार्यक्रम के अध्यक्ष डाॅ. योगेन्द्रनाथ शर्मा ’अरूण’ सदस्य शासी परिषद, केंद्रीय हिंदी शिक्षण मंडल, आगरा, मुख्य अतिथि डाॅ. दामोदर खड़से, सदस्य शासी परिषद, केंद्रीय हिंदी शिक्षण मंडल, आगरा रहे एवं सान्निध्य एवं मार्गदर्शक के रूप में केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा की यशस्वी निदेशक प्रो. बीना शर्मा उपस्थित रहीं एवं सभी अतिथियों का स्वागत परिचय एवं बीज वक्तव्य नवीकरण एवं भाषा प्रसार विभाग के अध्यक्ष प्रो. उमापति दीक्षित रहे एवं कार्यक्रम परिचय एवं संचालन का दायित्व डाॅ. दिग्विजय कुमार शर्मा ने निर्वहन किया। अंत में धन्यवाद सुरेश मीणा ने दिया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डाॅ. दामोदर खड़से ने केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा को धन्यवाद और बधाई देते हुए कहा कि केेंद्रीय हिंदी संस्थान हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। आज हिंदी की स्थिति हमारे लिए अनुकरणीय है क्योंकि हमारा देश बहुभाषी राष्ट्र है और हिंदीतर भाषी क्षेत्र में आज हिंदी तेजी से विस्तार कर रही है, जो कि संपूर्ण राष्ट्र को संपर्क सूत्र में जोड़ने वाली राष्ट्रभाषा हिंदी है। आज हम सभी हिंदी पढ़ रहे हैं। हिंदी लिख रहे हैं। यह हमारे लिए गर्व की बात है। हम देखते हैं कि आज टी.वी. के द्वारा फिल्मों के द्वारा हिंदी भाषा का प्रचार-प्रसार हो रहा है। जो लोगों को रोजगार उपलब्ध करा रही है। जैसे हिंदी फिल्मों की पटकथा लेखन द्वारा, जो लोग हिंदी भाषा सीख रहे हैं उन्हें रोजगार के क्षेत्र में असीमित संभावएं हैं। वैश्वीकरण में पूरी दुनिया प्रवेश कर चुकी है, जिसमें अनुवाद के द्वारा वैश्विक भाषाओं का प्रचार-प्रसार हो रहा है। अनुवाद प्रक्रिया में हम विश्व की अन्य भाषाओं को हिंदी के साथ जोड़कर वैश्विक जानकारी प्राप्त की जा सकती है। हमारे देश में प्रकाशित होने वाले दस महत्वपूर्ण अखबारों में पहले पांच हिंदी के अखबार आते हैं, जिससे अनुमान लगाया जा सकता है संपूर्ण राष्ट्र में हिंदी की स्थिति सुखद है। आज लोग देश के किसी भी क्षेत्र में हिंदी भाषा में छपे समाचार पत्र को पढ़ना पंसद करते हैं। इसे हम हिंदी भाषा के प्रति प्रेम मानते हैं।
तमाम तरह के इलेक्ट्राॅनिक साधन यूट््यूब, फेसबुक, व्हाट््सएप, ट्विटर एकांउट आदि इन साधनों में सबसे अधिक हिंदी भाषा का प्रयोग हो रहा है। इसके द्वारा हम आने वाली पीढ़ियों को हिंदी से जोड़ सकते हैं।
भाषा के प्रचार-प्रसार में महाराष्ट्र के एक छोटा-सा गांव बेलार है, इस गांव के प्रत्येक घर में हिंदी भाषा से या अन्य क्षेत्रीय भाषाओं से संबंधित साहित्य की विभिन्न विधाओं में प्रकाशित सामग्री अपने घर में रखते हैं। जिससे अनुवाद के द्वारा राष्ट्रभाषा के रूप में हिंदी में अनुवाद करके तैयार किया जाता है। इस कार्य के लिए भारत सरकार एक निश्चित अनुदान बेलार गांव को देती है। आज हिंदी अनुवाद की भाषा पत्र व्यवहार की भाषा और इलेक्ट्राॅनिक उपकरण की भाषा बन चुकी है। आज भारत के साथ-साथ पूरी दुनिया में हिंदी भाषा का प्रचार-प्रसार अन्य क्षेत्रीय भाषाओं को अनुवाद के द्वारा हिंदी भाषा के साथ जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
संस्थान की निदेशक प्रो. बीना शर्मा ने कहा कि सीखने में अनुभव सबसे महत्वपूर्ण बिंदु है, जिसमें आज शिक्षक बनना अपने-आप में बहुत बड़ी बात है और जब आप हिंदी भाषा के शिक्षक बनते हैं तो यह और भी अधिक महत्वपूर्ण बात है। क्योंकि आप जिस हिंदी भाषा को सीख रहे हैं वह राष्ट्रभाषा है इसलिए भाषा को सीखते समय किसी भी विद्यार्थी को आलस्य नहीं करना चाहिए। सबसे पहले विद्यार्थी को आलस्य त्यागना चाहिए, क्योंकि आलस्य करने से धन, बल और बुद्धि तीनों का ह्रास होता है। सीखते समय सभी विद्यार्थियों को और शिक्षकों को सरल और छोटे-छोटे शब्द रचना के द्वारा अपनी बात करें। अध्यापकों को अपने कौशल पर विचार करना चाहिए कि विद्यार्थियों के साथ किस प्रकार शुद्ध उच्चारण जिसमें वाचन लेखन पर अधिक बल देने की आवश्यकता है। ऐसा करने से आप भाषा को सही प्रकार से पढ़ा सकते हैं।
अध्यक्षीय उद्बोधन में डाॅ. योगेन्द्रनाथ शर्मा ’अरूण’ कहा कि हमको अहिंदीतर क्षेत्र के विद्यार्थियों को पढ़ाते समय पाठ्यक्रम से बंधकर नहीं पढ़ाना है बल्कि हमको सामान्य अध्यापन पर बल देने की आवश्यकता है। ऐसा करने से विद्यार्थियों में कौशल विकास होगा। उनसे हिंदी फिल्मों के गाने सुने, कहानी सुने, कविता सुने आदि पर ध्यान देने की आवश्यकता है। हम विद्यार्थियों को तभी सिखा सकते हैं जब हम उनसे मित्रवत व्यवहार करें। अधिक-से-अधिक विद्यार्थियों की बात सुनें। उनसे वार्तालाप करें।
अतिथि स्वागत एवं बीज वक्तव्य देते हुए प्रो. उमापति दीक्षित ने सभी विद्वानों का परिचय देते हुए आदर सत्कार और स्वागत किया। यह हमारा सौभाग्य है कि आॅनलाइन कार्यक्रम शुभारंभ में एक साथ शासी परिषद के दो सदस्य जुड़ रहे हैं। आपके मार्गदर्शन और सुझाव छात्र हित में उपयोगी सिद्ध होंगे। विद्या इस संसार में श्रेष्ठ धन है, जिसकी सर्वत्र पूजा होती है। अर्थात्् सभी विद्यार्थियों को विद्या अर्जन अवश्य करना चाहिए। विद्यार्थी के आवश्यक पांच लक्षण होते हैं। विद्यार्थी विद्या अर्जन के साथ-साथ अपने कौशल का भी विकास कर सकते हैं। मुझे आशा और विश्वास है कि हमारे सभी प्राध्यापक विद्यार्थियों को हिंदी भाषा संवर्धनात्मक पाठ्यक्रम को सीमित समयावधि में पूर्ण करने का प्रयास करेंगे। विभाग के सदस्य श्री प्रमोद पाठक उपस्थित रहे एवं श्री निर्मल कुमार सिन्हा, अनिल कुमार शर्मा ने आॅनलाइन उद्घाटन कार्यक्रम में महत्वपूर्ण सहयोग दिया।
इस कार्यक्रम में संस्थान के सभी शैक्षिक सदस्य एवं डाइट नामची (सिक्किम) से सभी शिक्षक एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

– डाॅ. दिग्विजय कुमार शर्मा
कार्यक्रम सह-संयोजक
नवीकरण एवं भाषा प्रसार विभाग

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