नई दिल्ली स्वास्थ्य

देर होने से पहले बनें समझदार, अच्छी सेहत के लिए तंबाकू छोड़ने और छुड़ाने का लें ‘संकल्प’

इंडिया समाचार 24
शंभू नाथ गौतम, वरिष्ठ पत्रकार

नई दिल्ली। आज 31 मई है। महीने की आखिरी तारीख हमेशा से बदलाव और संकल्पों की साक्षी रही है । इसके बाद नए महीने की शुरुआत होती है । पिछले महीनों की कमियों को भूलकर ‘नए इरादों’ के साथ मनुष्य आगे बढ़ता है। कल मंगलवार को एक जून शुरू हो रहा है। यानी नया करने की शुरुआत। आज मई के आखिरी दिन कुछ ऐसा करें जिससे आपका स्वास्थ्य भी सही रहे। आइए अब बात को आगे बढ़ाते हैं। 31 मई को ‘विश्व तंबाकू निषेध दिवस’ मनाया जाता है । इस मौके पर तंबाकू से होने वाली हानियों के बारे में चर्चा करेंगे।भागदौड़ भरे जीवन में ऐसे ही तमाम बीमारियां लोगों को घेरती जा रही हैं। मनुष्य को एक जीवन मिला हैै, इसको भरपूर हर दिन हर पल खूब ‘इंजॉय’ कर के जियो। कोई भी मादक व्यसन का उपयोग न करें, यह हमारे शरीर को बहुत तेजी से नुकसान पहुंचाते हैं, जब तक हम उसके बारे में जान पाते हैं तब तक बहुत देर हो जाती है। तंबाकू यह ऐसा नशा है जिसको ‘धीमा जहर’ भी कहा जाता है। वैसे यह भी सच है कि कोरोना महामारी के दौरान देश और दुनिया के लोग अपनी सेहत के प्रति बहुत सचेत हुए हैं। अगर आप तंबाकू के आदी हैं तो आज अच्छे जीवन और स्वस्थ शरीर के लिए ‘संकल्प’ लीजिए कि इसका सेवन कभी नहीं करेंगे। यहां हम आपको बता दें कि विश्व स्वास्थ संगठन के द्वारा हर वर्ष वर्ल्ड नो टोबैको डे के लिए एक विशेष ‘थीम’ तय की जाती है। इस वर्ष यानी 2021 के लिए इस दिन की थीम ‘छोड़ने के लिए प्रतिबद्ध’ रखी गई है। हर वर्ष वर्ल्ड नो टोबैको डे पर जो कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं वो इसी विशेष थीम पर आधारित होते हैं। कोरोना के चलते इस वर्ष ज्यादातर कार्यक्रम ऑनलाइन माध्यम से आयोजित होंगे। इसी क्रम में स्वास्थ्य विभाग के द्वारा ‘तम्बाकू छोड़ने के लिए प्रतिबद्ध’ विषय पर पोस्टर एवं स्लोगन प्रतियोगिता का आयोजन बीती 20 मई से किया गया है जो 10 जून, 2021 तक डिजिटल माध्यम से आयोजित होगी। तो आइए इस बार संकल्प लें कि तंबाकू रूपी जहर को हमेशा के लिए अलविदा कह देंगे। विश्व तंबाकू निषेध दिवस के मौके पर तंबाकू या इसके उत्पादों के उपभोग पर रोक लगाने या इस्तेमाल को कम करने के लिए लोगों को जागरूक किया जाता है। इस दिन का मुख्य उद्देश्य लोगों को तंबाकू से होने वाले स्वस्थ्य नुकसान के विषय में सचेत करना है। इसमें सिगरेट, बीड़ी, गुटखा और खैनी जैसे तंबाकू उत्पादों का सेवन करने वाले लोग शामिल हैं। तंबाकू के प्रति के युवा वर्ग भी बहुत तेजी के साथ आकर्षित होते जा रहे हैं।‌ आप भी तंबाकू छोड़िए और जो लोग इसका सेवन कर रहे हैं उनको भी इसकी आदत छुड़वाइए ।

तंबाकू की वजह से हर साल दुनिया में 70 लाख से अधिक लोगों की मौत होती हैं–

एक रिपोर्ट के मुताबिक वर्तमान में तंबाकू की वजह से दुनिया भर में हर साल 70 लाख से ज्यादा मौतें हो रही हैं। वहीं भारत में 10 लाख लोग इसके सेवन से जान गंवा देते हैं । तंबाकू जानलेवा है बावजूद इसके दुनियाभर में इसकी खपत साल दर साल बढ़ती ही गई है। हर साल इससे होने वाली विभिन्न बीमारियों के चलते लाखों लोगों की मौत हो जाती है। दुनिया में कम उम्र में होने वाली मौतों का प्रमुख कारण तंबाकू के तमाम उत्पादों का सेवन भी है। आंकड़े इस बात की गवाही देते हैं कि कई विकासशील देशों में इसका उपभोग तेजी से बढ़ता गया है। भारत तंबाकू का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता है। यहां करीब 275 मिलियन यानी करीब 27.5 करोड़ युवा तंबाकू के विभिन्न उत्पादों का सेवन करते हैं। तंबाकू का सेवन एक प्रकार की लत है। कई लोग इसे छोड़ना तो चाहते हैं पर छोड़ नहीं पाते हैं। जो युवक किशोरावस्था में ही धूम्रपान शुरू करते हैं कुछ अर्से बाद उन्हें उसकी लत लग जाती है। धूम्रपान का सबसे पहला असर श्वसन प्रणाली पर पड़ता है। धूम्रपान करने वाले जिन वयस्कों को दिल की बीमारी घेरती है उसकी नींव किशोरावस्था में किए गए धूम्रपान के दौरान ही रखी जाती है। बता दें कि जो युवा धूम्रपान नहीं करते उनकी तुलना में धूम्रपान करने वालों की रेस्टिंग ‘हार्ट बीट’ हमेशा अधिक पाई जाती है।

वर्ष 1987 में पहला विश्व तंबाकू निषेध दिवस मनाने की हुई थी शुरुआत—

साल 1987 में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने तंबाकू के सेवन से होने वाले रोगों की वजह से मृत्युदर में वृद्धि को देखते हुए इसे एक महामारी माना। इसके बाद पहली बार 7 अप्रैल 1988 को डब्ल्यूएचओ की वर्षगांठ पर मनाया गया और जिसके बाद हर साल 31 मई को विश्व तंबाकू निषेध दिवस के रूप में मनाया जाने लगा। गौरतलब हैै कि भारत समेत दुनिया भर के तमाम देशों में युवाओं में इसकी लत तेजी के साथ लगती जा रही है। यहां हम आपको बता रहेे हैं कि तंबाकू के सेवन करने से यह बीमारियां होती हैं। कैंसर-फेफड़ों और मुंह का कैंसर होना, फेफड़ों का खराब होना, दिल की बीमारी, आंखों से कम दिखना, मुंह से दुर्गंध आदि। एक ओर भारत समेत दुनियाभर के देशों में इसके खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है, तो दूसरी ओर कंपनियां तंबाकू उत्पादों को युवाओं और महिलाओं में लोकप्रिय करने की कोशिश कर रही हैं। तंबाकू विरोधी अभियानों पर दुनिया के देश जितना खर्च करते हैं, उससे पांच गुना ज्यादा वे तंबाकू पर टैक्स लगाकर कमाते हैं। आज इस मौके पर आइए हम सब लोग समाज के जिम्मेदार नागरिक बने और उसको छोड़ने और छुड़ाने का संकल्प लें।

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