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सौरव गांगुली ने अपनी शर्तों पर ही क्रिकेट खेली और कप्तानी की

इंडिया समाचार 24
शंभू नाथ गौतम, वरिष्ठ पत्रकार

आज बात करेंगे भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और वर्तमान में बीसीसीआई के अध्यक्ष सौरव गांगुली की । बात को आगे बढ़ाएं उससे पहले बता दें कि आज गांगुली का जन्मदिन भी है । 8 जुलाई 1972 को जन्मे भारतीय टीम के पूर्व कप्तान आज 48 वर्ष के हो चुके हैं । दादा, महाराज, टाइगर प्रिंस ऑफ कोलकाता न जाने कितने उपनामों से नवाजे गए हैं गांगुली । वे देश के एकमात्र ऐसे भारतीय क्रिकेट कप्तान रहे हैं जो अपनी शर्तों पर ही क्रिकेट और कप्तानी की है । हम बात करते हैं 90 के दशक की । भारतीय क्रिकेट टीम इंग्लैंड दौरे पर गई थी, उस टीम के सदस्य सौरव गांगुली भी थे । इंग्लैंड के साथ टेस्ट मैच में उन्हें 12वां खिलाड़ी घोषित किया गया था । इस बात से दादा इतने नाराज हुए कि वे टेस्ट मैच के दौरान भारतीय खिलाड़ियों को पानी देने से मना कर दिया था । इसी बात को लेकर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने उन्हें 3 साल के लिए अनुशासनहीनता के चक्कर में बाहर भी कर दिया था । बाद में जाकर वर्ष 1996 में वर्ल्ड कप में उनका एक बार फिर चयन किया गया । यहां से गांगुली ने क्रिकेट में आक्रामकता शुरू की ।‌ सौरव गांगुली ने एक बार तेंदुलकर सचिन तेंदुलकर लेकर बयान दिया था कि मैं सेंचुरी बनाने में विश्वास नहीं रखता हूं, देश को जिताने में मेरी पहली भूमिका होनी चाहिए । इस बयान के बाद गांगुली और तेंदुलकर में मतभेद उभर कर आए थे । मैदान पर इसी आक्रामक व्यवहार के कारण गांगुली को कई बार पाबंदियों का भी सामना करना पड़ा । स्टीव वॉ ऑस्ट्रेलिया के उन कप्तानों में शुमार थे, जो मैदान और मैदान के बाहर खुल कर बोलने के लिए जाने जाते थे । स्टीव वॉ का कहना था कि उस समय के भारतीय कप्तान गांगुली जान-बूझकर मैदान पर देर से आते थे । यही नहीं लंदन के लॉर्ड्स स्टेडियम में भारतीय क्रिकेट टीम के मैच जीतने के बाद जिस अंदाज में उन्होंने जर्सी उतारकर लहराई थी वह आज भी भारतीय क्रिकेट प्रशंसक नहीं भूल पाए हैं, यही नहीं मैदान में उन्हें लंबे शॉट मारने के लिए भी याद किया जाता है ।‌ सौरव गांगुली के क्रिकेट के इतिहास के सबसे प्रभावशाली कप्तानों में से एक माना जाता है।

भारतीय क्रिकेट टीम को शिखर में ले जाने के लिए गांगुली को हमेशा याद किया जाएगा–

भारतीय क्रिकेट टीम को शिखर पर ले जाने के लिए सौरव गांगुली को क्रिकेट प्रशंसक हमेशा याद रखेंगे ।गांगुली की कप्तानी में सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़, वीवीएस लक्ष्मण, वीरेंद्र सहवाग, हरभजन सिंह, जवागल श्रीनाथ, अनिल कुंबले व जहीर खान जैसे दिग्गज खिलाड़ी भी खेले। उनकी कप्तानी में टीम इंडिया ने दुनिया की बेहतरीन टेस्ट टीम को हराया और 2003 वनडे वर्ल्ड कप में फाइनल तक पहुंचे।गांगुली की कप्तानी में टीम इंडिया ने भारत में ऑस्ट्रेलिया को टेस्ट सीरीज में हराया था तो वहीं विदेशी धरती पर भी अच्छे प्रदर्शन के जरिए देश को गौरवान्वित किया। आइए नजर डालते हैं दादा की कप्तानी पर । सौरव गांगुली की कप्तानी में भारत ने साल 1999 से 2005 के बीच 146 वनडे मैचों में 76 जीते और 65 गंवाए, जबकि 5 मैचों के नतीजे नहीं आए, जबकि साल 2000 से 2005 के बीच उनकी अगुवाई में भारतीय क्रिकेट टीम ने 49 टेस्ट मैच खेले, इनमें से 21 में जीत दर्ज की और 13 में हार का सामना करना पड़ा। सौरव गांगुली ने अपने 113 टेस्ट में 16 शतकों, 35 अर्धशतकों की मदद से बनाए 7212 रन, जबकि 311 वनडे में 22 शतकों और 72 अर्धशतकों की मदद से बनाए 11363 रन बनाए हैं।

क्रिकेट टीम के कोच रहे ग्रेग चैपल के विवाद के बाद गांगुली के करियर पर पड़ा था असर–

सौरव गांगुली अपने क्रिकेट के पीक पर थे । उस समय भारतीय क्रिकेट टीम के कोच रहे ऑस्ट्रेलिया के ग्रेग चैपल से उनका विवाद इतना बढ़ गया कि भारतीय क्रिकेट टीम दो गुटों में बढ़ गई थी । गांगुली और चैपल के बीच विवाद इतना बढ़ गया था कि गांगुली को 2005 में भारतीय टीम के कप्तान पद से हटा दिया गया । यही नहीं गांगुली को वनडे टीम से भी हटा दिया गया । सबसे बड़ी बात यह है कि गांगुली की सिफ़ारिश पर ही ग्रेग चैपल को भारतीय टीम को कोच बनाया गया था । आखिरकार गांगुली टीम में आए और 2007 की विश्व कप की टीम का हिस्सा भी बने, जिसके कप्तान राहुल द्रविड़ थे । लेकिन गांगुली के मन में चैपल को लेकर टीस बनी रही । 2007 में टीम के खराब प्रदर्शन के बाद ग्रेग चैपल की कोच पद से छुट्टी हो गई । हालांकि कुछ समय बाद सौरव गांगुली ने भी क्रिकेट टीम से संन्यास ले लिया था। सौरव गांगुली को 1997 में अर्जुन अवॉर्ड और 2004 में पद्मश्री से सम्मानित किया जा चुका है। आज भी दादा बीसीसीआई के अध्यक्ष बनने के बाद क्रिकेट में उतने ही सक्रिय हैं जितने कि भारतीय क्रिकेट टीम के सदस्य हुआ करते थे । आज उनके जन्मदिन के मौके पर सचिन तेंदुलकर विराट कोहली, वीरेंद्र सहवाग समेत सैकड़ों क्रिकेट खिलाड़ियों ने उन्हें शुभकामनाएं भी दी है ।

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